मलिक मुहम्मद जायसी — बारहमासा
जायसी और पद्मावत
जायसी के बारे में मुख्य बातें, पद्मावत की कथा-शैली और 'बारहमासा' का विषय बताना।
कवि-परिचय. मलिक मुहम्मद जायसी अमेठी के पास जायस के रहने वाले थे, इसलिए 'जायसी' कहलाए। वे पहुँचे हुए सूफ़ी फ़कीर माने जाते थे।
पद्मावत. वे सूफ़ी प्रेममार्गी शाखा के सबसे बड़े कवि हैं। उनके 'पद्मावत' में सिंहल की राजकुमारी पद्मावती और चित्तौड़ के राजा रत्नसेन के प्रेम की कथा है।
लौकिक में अलौकिक. इस लौकिक (सांसारिक) प्रेम-कथा में अलौकिक सत्ता (ईश्वर) का आभास और रहस्य का पुट मिलता है।
शैली और भाषा. पद्मावत फ़ारसी की मसनवी शैली में है: कथा सर्गों में बँटी नहीं। छंद दोहा-चौपाई हैं, और भाषा ठेठ अवधी। लोकजीवन के बिंब और लोकोक्तियाँ उनकी कविता को नया सौंदर्य देते हैं।
बारहमासा. पाठ के 'बारहमासा' में रत्नसेन की पहली रानी नागमती का विरह है: पति पद्मावती के लिए सिंहल चला गया है, और वह अगहन, पूस, माघ और फागुन महीनों में उसकी याद में तड़पती है।
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