हरिवंश राय बच्चन — आत्मपरिचय, एक गीत
आत्मपरिचय
कविता के विरोधाभासों (शीतल वाणी में आग, रोदन में राग) का अर्थ बताना।
दुनिया का भार, मन में प्यार. 'मैं जग-जीवन का भार लिए फिरता हूँ': कवि दुनिया की ज़िम्मेदारियाँ उठाए फिरता है, फिर भी उसके मन में प्यार है।
अपने मन का गीत. वह दुनिया की तारीफ़ की परवाह नहीं करता। वह अपने मन का गीत गाता है।
सपनों का संसार. उसे यह अधूरा संसार अच्छा नहीं लगता, इसलिए वह अपने मन में सपनों का संसार लिए फिरता है।
मस्ती. वह सुख और दुख, दोनों में मस्त रहता है। उसकी शांत आवाज़ में भी आग है, और उसके रोने में भी राग (संगीत)।
नया दीवाना. दुनिया उसके रोने को गाना कहती है। पर वह खुद को कवि नहीं, दुनिया का एक नया दीवाना कहता है। कवि दुनिया में रहकर भी अपनी अलग राह चलता है: उसका दुनिया से नाता प्रेम का भी है और विरोध का भी।
Practise this lesson
Questions that get harder as you improve, a Tutor that helps without giving the answer away, and progress you can see. Free for every learner.
No account, no email address. Opens the real product.