बाज़ार दर्शन
बाज़ार का जादू
बताना कि बाज़ार का जादू किस पर चलता है और उससे बचने का उपाय क्या है।
पहले मित्र. लेखक के एक मित्र मामूली चीज़ लेने बाज़ार गए, और ढेर सारे बंडल लेकर लौटे। उनका सारा पैसा अपनी 'पर्चेज़िंग पावर' (ख़रीदने की ताकत) दिखाने में उड़ गया।
मूक आमंत्रण. बाज़ार का 'मूक आमंत्रण' (चुपचाप बुलाना) मन में चाह जगाता है: लगता है, अपने पास कुछ नहीं, और यहाँ सब कुछ है।
दूसरे मित्र. दूसरे मित्र दिन भर बाज़ार घूमकर खाली हाथ लौटे। क्योंकि उन्हें सब कुछ चाहिए था, और वे कुछ भी छोड़ना नहीं चाहते थे; इसलिए कुछ भी तय न कर सके।
जादू आँख से. बाज़ार का जादू आँख की राह चलता है। जब जेब भरी हो और मन खाली, तो यह खूब असर करता है। जादू उतरने पर वही फ़ैंसी चीज़ें आराम में खलल डालती हैं।
उपाय. उपाय: मन खाली न हो, लक्ष्य से भरा हो, जैसे लू में जाने से पहले पानी पीकर जाते हैं। पर मन बंद भी न हो, क्योंकि मन को ज़बरदस्ती बंद करना हठयोग है। जो जानता है कि उसे क्या चाहिए, उस पर बाज़ार का जादू नहीं चलता।
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