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काले मेघा पानी दे

इंदर सेना या मेढक-मंडली

इंदर सेना के गीत और लेखक की आपत्ति को समझाना।

सूखा. जेठ-आषाढ़ में बारिश न होने पर खेत पत्थर जैसे हो जाते, कुएँ सूख जाते, और पशु मरने लगते।

इंदर सेना. तब दस-बारह से सोलह-अठारह बरस के लड़के, लगभग नंगे बदन, 'गंगा मैया की जय' बोलकर गली-गली निकलते।

उनका गीत. उनके गीत में बादलों से पानी की पुकार है: 'काले मेघा पानी दे, पानी दे गुड़धानी दे'; घड़ा फूटने की, प्यासे बैलों की बात है। लोग बचाकर रखा पानी भर-भरकर उन पर फेंकते।

दो नाम. चिढ़ने वाले उन्हें 'मेढक-मंडली' कहते, पर वे खुद को 'इंदर सेना' (वर्षा के देवता इंद्र की सेना) मानते।

लेखक की आपत्ति. आर्यसमाजी संस्कारों वाले किशोर लेखक को यह पानी की निर्मम बरबादी और अंधविश्वास लगता था: जब पानी की इतनी कमी है, तो उसे ऐसे क्यों बहाएँ? पर जब विज्ञान उपाय न दे, तो लोग आशा का कोई रास्ता खोजते हैं।

जब विज्ञान उपाय न दे, लोग आशा का कोई रास्ता खोजते हैं।

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