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शिरीष के फूल

हजारी प्रसाद द्विवेदी

द्विवेदी जी की विशेषताएँ और इस ललित निबंध का मूल विचार बताना।

लेखक-परिचय. हजारी प्रसाद द्विवेदी का जन्म सन् 1907 में बलिया के आरत दुबे का छपरा में हुआ, और मृत्यु सन् 1979 में दिल्ली में।

बहुमुखी लेखक. वे उपन्यासकार ('बाणभट्ट की आत्मकथा'), निबंधकार ('अशोक के फूल', 'कुटज') और हिंदी साहित्य के इतिहासकार थे। 'आलोक पर्व' पर उन्हें साहित्य अकादेमी पुरस्कार मिला।

मानवतावाद. उनके अनुसार भारतीय संस्कृति अनेक जातियों के श्रेष्ठ तत्त्वों के मेल से बनी है; उसकी मूल चेतना मानवतावाद है।

'शिरीष के फूल'. यह 'कल्पलता' संग्रह का एक ललित निबंध है।

शिरीष का प्रतीक. भीषण गरमी में खिलता शिरीष इसमें मनुष्य के जीने के न हारने वाले संकल्प, धैर्य, और गांधी जी के आत्मबल का प्रतीक है। द्विवेदी जी के लिए साहित्य मनुष्य को ऊँचा उठाने का साधन है।

द्विवेदी जी के लिए साहित्य मनुष्य को ऊँचा उठाने का साधन है।

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