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सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' — बादल राग

निराला

बताना कि निराला को बादल क्यों प्रिय है और यह कविता किसका राग है।

कवि-परिचय. सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' का जन्म सन् 1899 में महिषादल (बंगाल) में हुआ। उनका पारिवारिक गाँव उन्नाव का गढ़ाकोला है। निधन सन् 1961 में इलाहाबाद में हुआ।

मुक्त छंद. वे छायावाद के कवि हैं, पर मुक्त छंद लिखकर उन्होंने छंद और रूढ़ियों के बंधन तोड़े।

दो तरह की भाषा. उनकी भाषा में एक ओर कठिन तत्सम शब्द हैं ('राम की शक्ति पूजा'), तो दूसरी ओर देसी शब्द ('कुकुरमुत्ता')।

बादल की दो शक्तियाँ. बादल में सृजन (बनाने) और ध्वंस (तोड़ने), दोनों की शक्ति है। किसान के लिए वह खुशी है, और मज़दूर के लिए क्रांति।

'बादल राग'. यह कविता 'अनामिका' में छह खंडों में है; यहाँ उसका छठा खंड है, जिसमें बादल को क्रांति के रूप में बुलाया गया है। निराला का बादल आम आदमी की खुशहाली का राग है।

निराला का बादल आम आदमी की खुशहाली का राग है।

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