तुलसीदास — कवितावली, लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप
पाँच छंद
हर छंद की मात्रा या वर्ण-संख्या बताना और उदाहरण पहचानना।
चौपाई. सम मात्रिक छंद: हर चरण में 16 मात्राएँ। चालीस चौपाइयों की रचना 'चालीसा' कहलाती है (जैसे हनुमान चालीसा)।
दोहा. अर्धसम मात्रिक छंद: विषम चरणों (पहला, तीसरा) में 13, और सम चरणों (दूसरा, चौथा) में 11 मात्राएँ।
सोरठा. दोहे का उलटा: विषम चरणों में 11, सम चरणों में 13 मात्राएँ; और तुक विषम चरणों में मिलती है।
कवित्त (मनहरण). वार्णिक छंद (वर्ण गिने जाते हैं): हर चरण में 31 वर्ण, 16 और 15 वर्ण पर यति (रुकना), और अंत में गुरु वर्ण।
सवैया. वार्णिक छंद: हर चरण में 22 से 26 वर्ण। मत्तगयंद इसका सबसे प्रसिद्ध भेद है। तुलसी इन पाँचों छंदों के सिद्ध कवि हैं।
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