हिंद महासागर में छोटा-सा हिंदुस्तान
पत्र के अंग
'दिनकर' का लिखा एक पत्र पढ़ो और पत्र के अंग पहचानो।
किताब के पृष्ठ 142 पर 'दिनकर' का लिखा एक पत्र दिया गया है। इसे पढ़कर हम पत्र के अंग (हिस्से) पहचानना सीखते हैं — किसने लिखा, किसे लिखा, कब और कहाँ से लिखा।
पत्र में सबसे ऊपर स्थान लिखा है — नई दिल्ली। उसके नीचे तिथि लिखी है — 8-7-67, यानी सातवें महीने (जुलाई) की 8 तारीख। इससे पता चलता है कि पत्र कहाँ से और कब लिखा गया।
फिर संबोधन आता है: पत्र चतुर्वेदी जी को लिखा गया है, और आदर दिखाने के लिए उनके नाम से पहले 'मान्यवर' शब्द लिखा है — 'मान्यवर चतुर्वेदी जी'।
फिर पत्र की मुख्य बात: लेखक बताते हैं कि उन्हें चतुर्वेदी जी का पत्र मिला; उनका स्वास्थ्य इधर बहुत गिर गया है और मन (चित्त) भी दबा हुआ है। फिर भी उन्होंने दो सप्ताह के लिए मॉरिशस जाना स्वीकार कर लिया है। 15 जुलाई को उन्हें प्रस्थान करना है, और लौटना शायद 5 अगस्त तक हो। अंत में वे चतुर्वेदी जी के आशीर्वाद की कामना करते हैं।
सबसे आखिर में लिखने वाले ने अपने नाम से पहले अपने लिए 'आपका' लिखा है — 'आपका दिनकर' — और नीचे अपना पता: सफ़दरजंग लेन, नई दिल्ली। तो पत्र दिनकर ने लिखा है। याद है? पाठ में भी लेखक 15 जुलाई को दिल्ली से ही यात्रा पर चले थे।
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