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हार की जीत

कहानी के मुहावरे

कहानी में आए मुहावरे सीखो।

आपकी किताब 'मल्हार' के पाठ 4 'हार की जीत' में कई मुहावरे आए हैं। मुहावरा ऐसा शब्द-समूह होता है जिसका अर्थ उसके शब्दों के सीधे अर्थ से अलग होता है। जैसे 'हृदय पर साँप लोटना' में सच का कोई साँप नहीं होता! आइए, कहानी के पाँच मुहावरे समझें।

लट्टू होना — किसी पर मोहित हो जाना, उसे बहुत पसंद करना। कहानी में बाबा भारती सुलतान की चाल पर लट्टू थे; उन्हें उसकी चाल मोर के नाच जैसी लगती थी।

हृदय पर साँप लोटना — किसी की अच्छी चीज़ देखकर ईर्ष्या (जलन) से बेचैन हो जाना। कहानी में जब बाबा ने सुलतान पर सवार होकर उसकी चाल दिखाई, तो उसे देखकर खड्गसिंह के हृदय पर साँप लोट गया — उसे जलन होने लगी कि ऐसा घोड़ा उसके पास क्यों नहीं है।

फूले न समाना — बहुत अधिक प्रसन्न होना। कहानी में शाम को सुलतान पर घूमते हुए बाबा कभी घोड़े का शरीर देखते, कभी उसका रंग, और मन में फूले न समाते थे। मुख खिल जाना — चेहरे पर खुशी आ जाना। खड्गसिंह सोचता है कि सुलतान को देखकर बाबा का मुख फूल की तरह खिल जाता था।

मुँह मोड़ लेना — किसी की ओर से ध्यान हटा लेना, उससे नाता तोड़ लेना। कहानी में बात कहते-कहते बाबा ने सुलतान की ओर से ऐसे मुँह मोड़ लिया, जैसे उससे कभी कोई संबंध ही न रहा हो। और अंत में बाबा कहते हैं कि अब कोई गरीबों की सहायता से मुँह न मोड़ेगा — यानी गरीबों की सहायता करने से कोई पीछे नहीं हटेगा।

मुहावरे का अर्थ उसके शब्दों से अलग होता है: लट्टू होना = मोहित होना, हृदय पर साँप लोटना = ईर्ष्या से बेचैन होना, फूले न समाना = बहुत प्रसन्न होना, मुख खिल जाना = चेहरे पर खुशी आना, मुँह मोड़ लेना = ध्यान हटा लेना या नाता तोड़ लेना।

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