तीन बुद्धिमान
वाक्यों का मिलान
पाठ के वाक्यों को उनके सही अर्थ से मिलाइए।
पृष्ठ 22 पर 'मिलकर करें मिलान' में पाठ के पाँच वाक्य हैं, और उनके सरल अर्थ अलग क्रम में। इससे सीखते हैं कि एक ही बात कई तरह से कही जा सकती है।
| पाठ का वाक्य | सरल अर्थ |
|---|---|
| कुछ समय पश्चात् पिता चल बसे। | थोड़े समय बाद पिता का देहांत हो गया। |
| हम कहीं भी क्यों न हों, भूखे नहीं मरेंगे। | हम चाहे जहाँ हों, खाने को कुछ न कुछ मिल ही जाएगा। |
| घुड़सवार ने भाइयों को शंका की दृष्टि से देखा। | घोड़े पर सवार व्यक्ति ने भाइयों को अविश्वास से देखा। |
| पाठ का वाक्य | सरल अर्थ |
|---|---|
| बचपन से हम कुछ भी अपनी दृष्टि से नहीं चूकने देते। | बचपन से हम हर छोटी-बड़ी चीज़ पर ध्यान ज़रूर देते हैं। |
| लोगों के आश्चर्य का कोई ठिकाना न था। | लोग इतने हैरान थे कि उनका आश्चर्य बताना कठिन था। |
ध्यान दीजिए:
- 'चल बसे' (मुहावरा) बदलकर 'देहांत हो गया' (सीधा शब्द) हो गया
- 'भूखे नहीं मरेंगे' (नकार) बदलकर 'कुछ न कुछ मिल ही जाएगा' (हाँ वाला वाक्य) हो गया
- ठिकाना न होना भी एक मुहावरा है = सीमा न होना
कहानी की भाषा में मुहावरे ज़्यादा होते हैं, सरल भाषा में सीधे शब्द। अर्थ एक, असर अलग! और लोककथा का असर ही उसे याद रखने लायक बनाता है।
मुहावरेदार वाक्य और सीधा वाक्य — अर्थ एक, प्रभाव अलग।
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