फूल और काँटा
कविता का सौंदर्य
कविता की पंक्तियों में उसकी सुंदरता खोजिए।
पृष्ठ 35 पर 'कविता का सौंदर्य' में एक सुंदर अभ्यास है: कविता की कुछ पंक्तियों से शब्द हटाए गए हैं, और साथ में मिलते-जुलते अर्थ वाले शब्द दिए हैं। हर शब्द रखकर देखिए कि कौन-सा जँचता है।
जिन शब्दों के अर्थ एक जैसे हों, उन्हें पर्यायवाची शब्द कहते हैं:
| शब्द | पर्यायवाची |
|---|---|
| रात | रात्रि, रजनी, निशा |
| चाँद | शशि, चंद्रमा, राकेश, इंदु |
| मेह | बादल, मेघ, जलद |
| हवा | वायु, पवन, समीर, मारुत, बयार |
अब कविता की मूल पंक्तियाँ याद कीजिए: "रात में उन पर चमकता चाँद भी, एक ही सी चाँदनी है डालता।" और "मेह उन पर है बरसता एक सा, एक सी उन पर हवायें हैं बही।"
कवि ने इन सूचियों में से 'रात', 'चाँद', 'मेह' और 'हवायें' ही क्यों चुने? क्योंकि यही शब्द पंक्ति की लय में बैठते हैं।
सीख: एक अर्थ के कई शब्द हो सकते हैं, पर कविता में हर जगह हर शब्द नहीं चलता। जो लय और तुक में बैठे, वही जँचता है। इसीलिए कवि शब्द चुनने में इतना समय लगाता है: अर्थ तो कई शब्द दे देंगे, पर संगीत एक ही देगा!
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