तरुण के स्वप्न
सेनानी, नारे और स्त्री सशक्तीकरण
स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों, उनके नारों और स्त्री सशक्तीकरण के बारे में जानिए।
'पाठ से आगे' में पाठ एक भाषण से निकलकर पूरे स्वतंत्रता संग्राम तक फैल जाता है। पुस्तक कहती है: शिक्षक, अभिभावक, पुस्तकालय और इंटरनेट की मदद ले सकते हैं।
मिलान कीजिए:
- 8 अप्रैल 1929 को सेंट्रल असेंबली में बम, 'शहीद-ए-आज़म' → भगत सिंह;
- 'स्वराज पार्टी' के संस्थापकों में एक, बोस के राजनीतिक गुरु → चित्तरंजन दास;
- जेल में भूख हड़ताल के तिरसठवें दिन देहांत → जतिन दास;
- जन्मदिवस पर 'अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस' → महात्मा गाँधी;
- नर्मदा के तट पर 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' → सरदार वल्लभभाई पटेल;
- "मेरा नाम आज़ाद, पिता का नाम स्वतंत्रता और पता कारावास" → चंद्रशेखर आज़ाद।
पाठ में आया नाम: इनमें से चित्तरंजन दास पाठ में भी है: वही 'देशबंधु', जिनके सपने से भाषण शुरू होता है।
स्त्री सशक्तीकरण. आज़ाद हिंद फौज में स्त्रियों की एक टुकड़ी थी: 'रानी झाँसी रेजिमेंट', जिसका नाम रानी लक्ष्मीबाई के नाम पर रखा गया।
'तुम मुझे खून दो…' यह नारा बोस ने 1944 में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष में दिया।
नारे और उनके सेनानी:
- 'स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है' → बाल गंगाधर तिलक;
- 'करो या मरो' → महात्मा गाँधी;
- 'मैं आज़ाद हूँ, आज़ाद रहूँगा और आज़ाद ही मरूँगा' → चंद्रशेखर आज़ाद;
- 'इंकलाब ज़िंदाबाद' → मौलाना हसरत मोहानी ने दिया, भगत सिंह और साथियों ने घर-घर पहुँचाया;
- 'पूर्ण स्वराज' → नारा नहीं, 1929 के लाहौर अधिवेशन का प्रस्ताव, जो जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में पारित हुआ।
ध्यान दीजिए: लाहौर अधिवेशन इसी भाषण के वर्ष (1929) का है। उसी साल भगत सिंह का बम (अप्रैल) और जतिन दास की भूख हड़ताल भी हुई।
Practise this lesson
Questions that get harder as you improve, a Tutor that helps without giving the answer away, and progress you can see. Free for every learner.
No account, no email address. Opens the real product.