एक आशीर्वाद
मिलकर करें मिलान
कविता की पंक्तियों को उनके सही भाव से मिलाइए।
मिलान. कविता की चार पंक्तियाँ और उनके चार भाव हैं।
1. 'भावना की गोद से उतरकर जल्द पृथ्वी पर चलना सीखें।'
→ भावनाओं में न बहकर वास्तविकता का सामना करना।
कुंजी 'पृथ्वी' शब्द है: पृथ्वी = असली धरातल, 'गोद' = भावना का सहारा।
2. 'हर दीये की रोशनी देखकर ललचाएँ।'
→ तरह-तरह के ज्ञान की ओर खिंचना और उसे पाने की ललक होना।
कुंजी 'हर' शब्द है: किसी एक दीये की नहीं, हर दीये की, यानी ज्ञान के हर रूप की ओर ललक। दीया प्रकाश का, और प्रकाश ज्ञान का प्रतीक है। (यह दूसरों की चीज़ें देखकर लालच करना नहीं है।)
3. 'चाँद-तारों-सी अप्राप्य सच्चाइयों के लिए रूठना-मचलना सीखें।'
→ असंभव लगने वाले लक्ष्यों के लिए हठ और प्रयास करना।
अप्राप्य = जो पाया न जा सके; रूठना-मचलना = बच्चे जैसी ज़िद। बच्चा चाँद माँगता है, और उसकी यही ज़िद कवि चाहता है।
4. 'हँसें/मुसकराएँ/गाएँ।'
→ सपनों को आनंद में बदलना, और कठिनाई में भी मनोबल (हिम्मत) बनाए रखना।
ध्यान दीजिए: यह पंक्ति कठिन बातों के बीच आती है, इसलिए इसका भाव मनोबल से जुड़ता है।
मिलान करते समय: हर पंक्ति के मुख्य शब्द (पृथ्वी, हर, अप्राप्य) पर ध्यान दीजिए, और अर्थ भाव में खोजिए।
Practise this lesson
Questions that get harder as you improve, a Tutor that helps without giving the answer away, and progress you can see. Free for every learner.
No account, no email address. Opens the real product.