LearnWave
Learn it. Master it.

कबीर के दोहे

अनुमान और कल्पना से

अनुमान और कल्पना से छह सौ साल पुराने दोहों पर सोचिए।

अनुमान और कल्पना. इन प्रश्नों का कोई एक निश्चित उत्तर नहीं। इनका काम है कि छह सौ साल पुराने दोहे आपके अपने जीवन तक पहुँचें।

1. क्या खजूर बेकार है? खजूर, नारियल जैसे ऊँचे पेड़ भी उपयोगी हैं:

  • खजूर के मीठे फल; पत्तों से चटाई और झाड़ू;
  • नारियल से पानी, गिरी, तेल, रेशा और जलाने की लकड़ी।

यह प्रश्न खुद दोहे से बहस करता है! तो क्या कबीर गलत थे? नहीं। वे पेड़ों का विज्ञान नहीं, एक उपमा दे रहे थे: उदार न होने वाले बड़े आदमी की। उपमा को उपमा समझना, यह भी बड़ी समझ है।

2. आज का जीवन. ज़रूरत से ज़्यादा मोबाइल या स्क्रीन का प्रयोग करने के क्या नतीजे हो सकते हैं? यह 'अति का भला न…' वाले दोहे को सीधे आज में ले आता है।

3. ईमानदारी. मान लीजिए शिक्षक ने आपके गलत उत्तर पर अंक दे दिए। आप क्या करेंगे? यहाँ 'साँच बराबर तप नहीं' कहना आसान है, करना कठिन।

4. गलती बताने वाले. अगर कोई हमारी गलतियाँ न बताए, तो हमें सुधरने का मौका नहीं मिलता। गलती बताने वाला हमें सुधारता है, हमें आगे बढ़ाता है। (यही निंदक वाला दोहा है।)

5. कटु वचन? क्या कभी कड़वी बात कहना भी ज़रूरी हो सकता है? यह प्रश्न दोहे को चुनौती देता है, और आपसे उत्तर माँगता है।

6. मन का पंछी. अगर मन पंछी की तरह उड़ सकता, तो आप उसे कहाँ ले जाते? मन जहाँ चाहे जाता है, इसलिए उसे कहाँ भेजना है, यह सोचकर तय करना चाहिए।

'खजूर बेकार नहीं है': यह प्रश्न खुद दोहे से बहस करता है, यही इसकी सुंदरता है।

Practise this lesson

Questions that get harder as you improve, a Tutor that helps without giving the answer away, and progress you can see. Free for every learner.

No account, no email address. Opens the real product.