मीडिया / Media
मीडिया: परिचय और पत्रकारीय लेखन
मीडिया लेखन की बुनियादी समझ बनाना।
इकाई नाज़िम हिकमत की आशा भरी पंक्तियों और रघुवीर सहाय के कथन से खुलती है: खबर लिखना भी कविता जैसा रचनात्मक काम है — लेखक तथ्य नहीं बदलता, पर तथ्यों को जोड़कर सच सामने लाता है।
अभिजीत ने मुहल्ले की बदबू की शिकायत संपादक को लिखी, वह छपी और काम हुआ। समाचार माध्यम जन-समस्याएँ उठाते हैं, सूचना देते हैं, जागरूक बनाते हैं और मनोरंजन करते हैं; इसीलिए समाचार मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना गया है।
माध्यम के तीन प्रकार: प्रिंट (अखबार, पत्रिकाएँ, पुस्तकें — सबसे पुराना, पढ़ना आना ज़रूरी), दृश्य-श्रव्य (रेडियो, टीवी, सिनेमा — साक्षर होना ज़रूरी नहीं) और नए माध्यम (इंटरनेट, मोबाइल — दर्शकों से अंतरक्रिया)।
विषय-वस्तु के आधार पर: समाचार मीडिया (तथ्य और विचार अलग, कल्पना की जगह नहीं — इसके लिए लेखन ही पत्रकारिता है) और गैर समाचार मीडिया (मनोरंजन, कहानी, गीत — कल्पना और प्रयोग)। पत्रकारीय लेखन के तीन रूप: समाचार लेखन, विचारपरक लेखन (संपादकीय, ऑप-एड, संपादक के नाम पत्र) और फ़ीचर लेखन।
मीडिया लेखन की विशेषताएँ: सरल बोलचाल की भाषा और छोटे वाक्य; माध्यम की प्रकृति का ध्यान (अखबार 24 घंटे में एक बार, टीवी-रेडियो हर घंटे, इंटरनेट हर पल — टीवी में दृश्य, रेडियो में शब्दों से चित्र); और पत्रकारिता के सिद्धांत — तथ्यों की शुद्धता, कई स्रोतों से जाँच, वस्तुनिष्ठता और निष्पक्षता।
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