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मीडिया / Media

साक्षात्कार और समीक्षा

साक्षात्कार लेना और समीक्षा लिखना सिखाना।

पत्रकारीय साक्षात्कार को 'समाचार की फैक्टरी का कच्चा माल' कहा जाता है; आम बातचीत से वह इसलिए अलग है कि उसका साफ़ उद्देश्य और ढाँचा होता है। इसके लिए तैयारी, ज्ञान, संवेदनशीलता, धैर्य और कई बार साहस चाहिए।

पाँच प्रकार: सूचनात्मक (छह ककारों से तथ्य), विचारपरक (राय — जैसे पर्यावरणविद माइक पांडेय से बातचीत), भावनात्मक (जैसे उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ से नीना झा की आखिरी बातचीत; रघुवीर सहाय की 'कैमरे में बंद अपाहिज' असंवेदनशील सवालों पर चोट करती है), विश्लेषणपरक (विशेषज्ञ से व्याख्या) और व्यक्तिपरक (प्रोफ़ाइल)।

प्रश्नों के प्रकार: तथ्यात्मक (बंद प्रश्न), व्याख्यात्मक (कैसे, क्यों — खुले प्रश्न), फॉलोअप (उत्तर से उपजे) और निश्चित (उसी व्यक्ति के लिए शोध से बने)। तैयारी: परिवार, मित्रों, पुराने साक्षात्कारों, पुस्तकालय और इंटरनेट से जानकारी; एक बार में एक प्रश्न; आसान प्रश्न पहले और कठिन अंत में।

साक्षात्कार के दौरान: रिकॉर्ड करें या नोट्स लें, अभिवादन और अंत में धन्यवाद, ध्यान से सुनें, बीच में न टोकें। बाद में जल्दी लिखें, दो बार पढ़ें — प्रश्न-उत्तर शैली में या फ़ीचर शैली में (मनोभाव और शारीरिक भाषा सहित)।

समीक्षा पाठक को कृति की खूबियाँ और कमियाँ बताती है — समीक्षक जौहरी की तरह भीड़ में हीरा खोजता है, पर जज बनकर फ़ैसला नहीं सुनाता। उदाहरण: कमलेश्वर की 'आँखों देखा पाकिस्तान' और फ़िल्म 'तारे ज़मीन पर' की समीक्षाएँ। शुरू में तथ्य (नाम, लेखक, प्रकाशक, मूल्य), फिर मुख्य पहलू, उदाहरण और कमियाँ — निष्पक्ष और शब्द-सीमा में। अंत में: समाचार माध्यमों में अनुवाद की दक्षता अनिवार्य योग्यता है।

अच्छा साक्षात्कार अच्छे प्रश्नों पर टिका है।

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