चिड़िया का गीत
कविता: चिड़िया का गीत
कविता 'चिड़िया का गीत' पढ़ो और एक छोटी चिड़िया से मिलो।
अपनी किताब 'वीणा' का पृष्ठ 2 खोलो और पाठ 1 की कविता 'चिड़िया का गीत' पढ़ो। यह कविता निरंकार देव 'सेवक' ने लिखी है। इसमें एक नन्ही चिड़िया खुद अपनी कहानी सुनाती है — वह बताती है कि जैसे-जैसे वह बड़ी हुई, उसका घर कैसे बदलता गया और संसार के बारे में उसकी सोच कैसे बदली।
कविता में चिड़िया कहती है कि सबसे पहले उसका घर अंडे जैसे आकार का था — यानी वह अंडे के अंदर थी। तब उसे लगता था कि बस, संसार इतना-सा ही है। 'इतना-सा' का अर्थ है बहुत छोटा।
फिर अंडे से निकलकर उसका घर बना घोंसला, जो सूखे तिनकों से तैयार हुआ था। तब भी उसे यही लगता था कि संसार इतना-सा ही है। उसके बाद वह घोंसले से निकलकर पेड़ की शाखाओं (डालियों) पर आ गई। वे शाखाएँ हरी-भरी और सुकुमार, यानी बहुत कोमल थीं। पर तब भी उसे संसार इतना-सा, बहुत छोटा ही लगा।
आखिर में एक दिन चिड़िया ने अपने पंख फैलाए और आसमान में दूर तक उड़ गई। तभी उसकी समझ में आया कि यह संसार तो बहुत बड़ा है!
तो कविता में चिड़िया के घर इस क्रम में आते हैं: पहले अंडा, फिर सूखे तिनकों का घोंसला, फिर हरी-भरी कोमल शाखाएँ, और आखिर में खुला आसमान। पहले तीनों जगह उसे संसार छोटा लगा; आसमान में उड़कर उसने जाना कि संसार बहुत बड़ा है।
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