ओणम के रंग
ओणम का लोकगीत
ओणम का एक लोकगीत पढ़ो।
अपनी किताब 'वीणा' का पृष्ठ 93 खोलो और पाठ 8 'ओणम के रंग' में राजा महाबली के राज के बारे में छपा लोकगीत पढ़ो। लोकगीत वह गीत होता है जिसे लोग पीढ़ियों से मिलकर गाते आए हैं। पाठ बताता है कि महाबली के शासन वाला यह सुंदर लोकगीत आज भी लोगों के होंठों पर है — यानी लोग इसे अब भी गाते हैं।
यह लोकगीत मूल रूप से मलयालम भाषा में है — मलयालम केरल की मुख्य भाषा है। किताब के पृष्ठ 101 पर इसका हिंदी रूप और मलयालम में लिखा मूल लोकगीत, दोनों साथ-साथ छपे हैं।
लोकगीत बताता है कि महाबली के राज में सब लोग एक समान थे — कोई ऊँचा-नीचा नहीं था। वहाँ दुख और गरीबी (दरिद्रता) का नाम तक नहीं था। न कोई डाका डालता था, न कोई किसी को धोखा देता था, और न कोई झूठ बोलता था।
व्यापार में भी सब ईमानदार थे: कोई नकली (जाली) तराज़ू नहीं था, और कोई नाप-तौल में कम सामान नहीं देता था। किसी तरह का छल-कपट नहीं था। हर जगह प्रेम और खुशी छाई हुई थी। इसीलिए केरल के लोग ऐसे अच्छे राजा को आज भी प्यार से याद करते हैं।
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