हमारे ये कलामंदिर
निशा की यात्रा
निशा और मौसी के साथ 'हमारे ये कलामंदिर' की यात्रा शुरू करो।
आपकी किताब 'वीणा' का पाठ 11 'हमारे ये कलामंदिर' एक यात्रा की कहानी है। निशा की मौसी ने उससे वादा किया था कि इस बार छुट्टियों में वे उसे अजंता और एलोरा की गुफाएँ दिखाएँगी। निशा ने पुस्तकों में इन गुफाओं के बारे में पढ़ा था, इसलिए उसके मन में बड़ी उत्सुकता थी कि ये देखने में कैसी होंगी।
दशहरे की छुट्टियाँ आईं, तो जाने का कार्यक्रम बन गया। दोनों रेलगाड़ी से छत्रपति संभाजीनगर पहुँचीं। संभाजीनगर महाराष्ट्र राज्य का एक नगर है। वहाँ पहुँचते-पहुँचते रात हो गई थी, इसलिए निशा और मौसी ने स्टेशन पर ही विश्रामगृह में रात बिताई।
अगले दिन बड़े सवेरे उठकर वे बस से अजंता की ओर चल दीं। संभाजीनगर से अजंता लगभग सौ किलोमीटर दूर है।
अजंता की गुफाएँ देखकर दोनों वापस संभाजीनगर आ गईं। फिर उसके अगले दिन वे बस में बैठकर एलोरा की गुफाएँ देखने गईं।
यात्रा का क्रम याद रखने का आसान तरीका: रेलगाड़ी से संभाजीनगर → स्टेशन के विश्रामगृह में रात → बस से अजंता → वापस संभाजीनगर → अगले दिन बस से एलोरा → घर वापस।
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