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हमारे ये कलामंदिर

स्मारकों पर व्यवहार

सोचो कि स्मारकों पर जाकर हमें कैसा व्यवहार करना चाहिए।

आपकी किताब 'वीणा' के पाठ 11 में निशा ने अजंता और एलोरा की बेजोड़ कलाकृतियाँ देखीं। पृष्ठ 140 पर 'हमारी धरोहर' में किताब बताती है कि ऐसी जगहों पर हमें कैसा व्यवहार करना चाहिए।

हमारे देश में बहुत सुंदर ऐतिहासिक स्मारक और कलाकृतियाँ हैं — जैसे अजंता की गुफाएँ और एलोरा का कैलाश मंदिर। ये हमारे देश की शोभा (सुंदरता) और गौरव (मान) बढ़ाते हैं। इन्हें धरोहर कहते हैं — ऐसी अनमोल चीज़ें जो पुरखों से हमें मिली हैं और जिन्हें हमें आगे आने वाले लोगों के लिए सँभालकर रखना है।

किताब कहती है कि इनकी सुंदरता बनाए रखना हमारा उत्तरदायित्व (ज़िम्मेदारी) है। स्मारकों को छूने से, उनकी दीवारों को खुरचने से, या उन पर कुछ भी लिखने या बनाने से उन्हें हानि पहुँचती है।

सोचो — अजंता के जो रंग दो हज़ार वर्ष से ज्यों के त्यों हैं, वे हाथ लगाने या खुरचने से कुछ ही दिनों में खराब हो सकते हैं। इसलिए ऐसी जगहों पर घूमते समय हमें सावधानी रखनी चाहिए: दूर से देखें, हाथ न लगाएँ, कुछ न लिखें और न खुरचें।

ऐतिहासिक स्मारक और कलाकृतियाँ देश की शोभा और गौरव हैं; उन्हें छूना, खुरचना या उन पर लिखना उन्हें हानि पहुँचाता है, इसलिए घूमते समय सावधानी रखना हमारा उत्तरदायित्व है।

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