LearnWave
Learn it. Master it.

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा

जानवरों का व्यवहार

जानो कि जंगल के जानवर कैसा व्यवहार करते हैं।

आपकी किताब 'वीणा' के पाठ 8 में चाचा अरूप ने अपने पत्र में यह भी लिखा है कि काजीरंगा के पशुओं ने कैसा व्यवहार किया — कौन डरा, कौन जमा रहा, कौन रखवाली करता रहा। किसी पशु के ऐसे व्यवहार को उसका स्वभाव कहते हैं।

पहले दिन, जब वे हाथियों पर बैठकर उद्यान में गए, तो हिरणों और भैंसों ने उन्हें संदेह की नज़र से देखा — जैसे सोच रहे हों कि ये लोग कौन हैं — और वे वहाँ से अलग हट गए। पर गैंडे अपनी जगह पर ही जमे रहे, वे हटे नहीं।

दूसरे दिन जीप से लौटते समय उन्हें जंगली हाथियों का एक झुंड दिखा। झुंड में पाँच-छह बच्चे भी थे। झुंड रास्ता पार कर रहा था, और एक विशाल (बहुत बड़ा) हाथी तब तक खड़ा होकर निगरानी करता रहा, जब तक पूरे झुंड ने रास्ता पार नहीं कर लिया।

काजीरंगा में मांसाहारी रॉयल बंगाल टाइगर (बाघ) भी हैं, पर चाचा अरूप को कोई बाघ नहीं दिखा। गाइड ने बताया कि उन्हें देखना कठिन है, क्योंकि वे रात में ही निकलते हैं।

पत्र के अंत में चाचा अरूप लिखते हैं कि काजीरंगा में अलग-अलग प्रजाति के पशु शांति और भाईचारे से साथ-साथ रहते हैं। उनके मन में बार-बार यह बात आती रही कि मनुष्य भी इनकी तरह मिल-जुलकर क्यों नहीं रहता। हम अपने वन-साथियों से बहुत कुछ सीख सकते हैं।

पाठ में हिरण और भैंसें संदेह से देखकर हट गए, गैंडे जमे रहे, एक विशाल हाथी झुंड के रास्ता पार करने तक निगरानी करता रहा, और बाघ इसलिए नहीं दिखे क्योंकि वे रात में ही निकलते हैं।

Practise this lesson

Questions that get harder as you improve, a Tutor that helps without giving the answer away, and progress you can see. Free for every learner.

No account, no email address. Opens the real product.