जूझ
नयी कक्षा में अजनबी
बताना कि लेखक ने कक्षा के अजनबीपन से कैसे जूझकर अपनी जगह बनाई।
अजनबी कक्षा. आनंदा फिर पाँचवीं कक्षा में बैठा। उसके सब पुराने साथी आगे निकल चुके थे। छोटे, अनजान लड़कों के बीच वह अजनबी था।
शरारत. चह्वाण का एक शरारती लड़का उसका गमछा छीनकर उसे सिर पर लपेटकर मास्टर की नकल करने लगा, और उसकी धोती खींचने की कोशिश की। आनंदा को लगा, पाठशाला उसे चोंच मार-मारकर घायल कर रही है।
हार न मानना. फिर भी वह अगले दिन उमंग से गया। माँ से नयी टोपी और चड्डी मँगवाई (धोती की जगह)। धीरे-धीरे लड़कों से परिचय बढ़ा।
मंत्री मास्टर और वसंत. मंत्री मास्टर (गणित के शिक्षक) के डर से सब लड़के पढ़ने लगे। होशियार वसंत पाटील, जो उम्र में छोटा था, कक्षा का मॉनीटर था।
मेहनत का फल. आनंदा ने वसंत की तरह मेहनत की: किताबों पर कवर चढ़ाए, ध्यान से पढ़ा। उसके गणित के सवाल सही होने लगे। वसंत से उसकी दोस्ती हुई, और मास्टर उसे प्यार से 'आनंदा' कहने लगे। हार न मानने से अजनबी कक्षा अपनी बन गई।
Practise this lesson
Questions that get harder as you improve, a Tutor that helps without giving the answer away, and progress you can see. Free for every learner.
No account, no email address. Opens the real product.