अतीत में दबे पाँव
औज़ार हैं, हथियार नहीं
बताना कि सिंधु सभ्यता 'समझ से अनुशासित' और आडंबरहीन क्यों मानी जाती है।
अजायबघर. यहाँ का अजायबघर (संग्रहालय) छोटा है। खुदाई में पचास हज़ार से ज़्यादा चीज़ें मिलीं। यहाँ गेहूँ, बर्तन, मुहरें, चौपड़, बाट, ताँबे का आईना, खिलौने और मनकों के हार रखे हैं।
औज़ार, हथियार नहीं. यहाँ औज़ार तो हैं, पर हथियार नहीं। पूरी सिंधु सभ्यता में राजतंत्र जैसे हथियार नहीं मिले। समाज में अनुशासन था, पर ताकत के बल पर नहीं।
लो-प्रोफ़ाइल सभ्यता. यहाँ न भव्य महल हैं, न मंदिर, न समाधियाँ। मूर्तियाँ, औज़ार, 'नरेश' का मुकुट और नावें भी छोटी हैं। इसलिए इसे 'लो-प्रोफ़ाइल' सभ्यता कहा गया: दिखावे से दूर।
समाज-पोषित सौंदर्य. इसका सौंदर्य-बोध राजा या धर्म का पाला हुआ नहीं, समाज का पाला हुआ था: सुंदर मृद्-भांड (मिट्टी के बर्तन), मुहरें, आभूषण, कशीदाकारी, सुघड़ लिपि।
आज की चुनौती. अब खुदाई रोक दी गई है, क्योंकि नदी का पानी रिसकर ज़मीन को खारा और दलदली बना रहा है। बचे हुए खंडहरों को बचाना ही आज की चुनौती है। लघुता में भी महत्ता: यही सिंधु सभ्यता की पहचान है।
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