आवारा मसीहा (दिशाहारा)
आवारगी से लेखक तक
अनुभवों से कहानीकार के बनने की प्रक्रिया समझाना।
गरीबी के दिन. देवानंदपुर में घर की हालत इतनी बिगड़ी कि गहने बिक गए, मकान गिरवी पड़ गया, और फ़ीस न होने से शरत् का स्कूल छूट गया।
'रॉबिनहुड'. शरत् लड़कों के दल का सरदार बन गया। वह बागों के फल और तालों की मछलियाँ लाकर गरीबों में बाँटता, और बीमारों के इलाज का प्रबंध करता। लेखक उसे रॉबिनहुड जैसा दुस्साहसी और परोपकारी कहते हैं। (यह उसकी करुणा दिखाता है; दूसरों की चीज़ें लेना अपने-आप में कोई आदर्श नहीं है।)
कहानीकार का जन्म. पंद्रह वर्ष की उम्र तक वह कहानी गढ़ने में पारंगत हो गया। ज़मींदार के बेटे अतुलचंद्र उसे थिएटर ले जाते और उससे कहानियाँ लिखवाते। उसकी पहली मौलिक कहानी थी 'काशीनाथ'; फिर 'काकबासा' और 'कोरेल ग्राम'।
- पिता की अधूरी कहानियाँ भी उसकी प्रेरणा बनीं: अंत न पाकर वह मन ही मन अपना अंत सोचने लगता।
दुखियों के दृश्य, जिन्होंने उसे गढ़ा:
- नीरू दीदी, एक बाल-विधवा, जिन्होंने सबकी सेवा की, पर एक भूल पर गाँव ने उन्हें बहिष्कृत कर दिया और वे अकेलेपन में चल बसीं। शरत् रात में छिपकर उनकी सेवा करता था।
- मृत्युंजय और विलासी को भी समाज ने ठुकराया, और उनका अंत दुखद हुआ: यही शरत् की कहानी 'विलासी' बनी।
- इन्हीं दृश्यों से उसके मन में प्रश्न उठा: मनुष्य अपने भीतर के देवता का इतना तिरस्कार कैसे करता है? यही संवेदना उसे कहानीकार बनाती है।
आगे की राह. पुरी की लंबी यात्रा के अनुभव आगे चलकर उपन्यास 'चरित्रहीन' का आधार बने। अंत में परिवार भागलपुर लौट आया, पर देवानंदपुर का ऋण वह कभी नहीं भूला।
नया उदाहरण. कोई पत्रकार अस्पताल के गलियारे में किसी परिवार को इलाज के पैसे के लिए भटकता देखे और उस पर एक मार्मिक रिपोर्ट लिखे: लेखक की कलम अकसर ऐसी ही आँखों देखी पीड़ा से चलती है।
Practise this lesson
Questions that get harder as you improve, a Tutor that helps without giving the answer away, and progress you can see. Free for every learner.
No account, no email address. Opens the real product.