चंद्रधर शर्मा गुलेरी — सुमिरिनी के मनके
गुलेरी जी और सुमिरिनी के मनके
गुलेरी जी की विशेषताएँ और तीनों लघु निबंधों के मूल विचार बताना।
लेखक-परिचय. चंद्रधर शर्मा गुलेरी जयपुर में जन्मे। वे अनेक भाषाओं के जानकार और संस्कृत के पंडित थे। इतिहास और पुरातत्व उनके प्रिय विषय थे।
'उसने कहा था'. उन्होंने निबंधों के साथ केवल तीन कहानियाँ लिखीं, पर 'उसने कहा था' उनकी पहचान ही बन गई।
बनारस. मालवीय जी के कहने पर उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय में प्राच्य विद्या विभाग की कमान सँभाली।
सुमिरिनी के मनके. 'सुमिरिनी के मनके' (माला के दाने) में तीन छोटे निबंध हैं: 'बालक बच गया' शिक्षा की सही उम्र पर; 'घड़ी के पुर्ज़े' धर्म पर कुछ लोगों के एकाधिकार पर; 'ढेले चुन लो' अंधविश्वास पर।
भाषा. उनकी भाषा सरल, बोलचाल की है, पर विषय को गंभीरता से उठाती है। तीनों निबंध समाज की बुनियादी समस्याओं पर सोचने को कहते हैं।
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