फणीश्वरनाथ 'रेणु' — संवदिया
बड़ी हवेली की बड़ी बहुरिया
हवेली का पतन, मोदिआइन का प्रसंग, बड़ी बहुरिया का संवाद और संवदिया के गुण समझाना।
बुलावा. डाकघरों के ज़माने में भी बड़ी हवेली से बुलावा पाकर हरगोबिन को अचरज हुआ। उसने भाँप लिया कि कोई गुप्त संवाद है, जो चिट्ठी में नहीं लिखा जा सकता।
बड़ी बहुरिया का दुख. बड़े भैया की मृत्यु के बाद भाइयों ने झगड़ा किया, बड़ी बहुरिया के ज़ेवर तक छीनकर बँटवारा किया, और शहर चले गए। हवेली की लक्ष्मी, बड़ी बहुरिया, अकेली रह गई।
मोदिआइन. उधार वसूलने आई मोदिआइन (दुकानदारिन) को हरगोबिन ने 'काबुली-कायदा' (कठोर वसूली) कहकर चिढ़ाया, तो वह बड़बड़ाती हुई चली गई। बड़ी बहुरिया की हालत इतनी बुरी थी।
संवाद. सिसकते हुए बड़ी बहुरिया ने संवाद दिया: माँ से कहना, मुझे यहाँ से ले जाए, नहीं तो मैं डूब मरूँगी। बथुआ-साग खाकर कब तक जिऊँ?
संवदिया का काम. संवदिया हर शब्द और हर सुर याद रखकर संवाद वैसा ही सुनाता है। गाँव के लोग हरगोबिन को निठल्ला समझते हैं, पर हर घर का संवाद उसी ने पहुँचाया है। हवेली की लक्ष्मी की बेबसी देखकर संवदिया का मन भी रो पड़ा।
Practise this lesson
Questions that get harder as you improve, a Tutor that helps without giving the answer away, and progress you can see. Free for every learner.
No account, no email address. Opens the real product.