भीष्म साहनी — गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात
भीष्म साहनी: लेखक और अनुवादक
भीष्म साहनी की प्रमुख कृतियाँ, भाषा-शैली और संस्मरण के तीन प्रसंग बताना।
लेखक-परिचय. भीष्म साहनी रावलपिंडी (अब पाकिस्तान) में जन्मे। उन्होंने लाहौर से अंग्रेज़ी में एम.ए., और पंजाब विश्वविद्यालय से पीएच.डी. की।
विभाजन के बाद. विभाजन के बाद उन्होंने पत्रकारिता की, इप्टा नाटक मंडली में काम किया, और फिर दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाया।
अनुवादक. मास्को में अनुवादक रहते हुए उन्होंने लगभग दो दर्जन रूसी पुस्तकों का हिंदी में अनुवाद किया।
रचनाएँ. 'तमस' उपन्यास पर उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। 'हानूश' और 'कबिरा खड़ा बज़ार में' उनके नाटक हैं।
यह पाठ. 'गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात' उनकी आत्मकथा 'आज के अतीत' का अंश है: सेवाग्राम में गांधी, कश्मीर में नेहरू, और ट्यूनिस में अराफ़ात। छोटे वाक्य, संवाद और उर्दू-पंजाबी की महक उनकी भाषा को आत्मीय बनाते हैं।
संस्मरण, आत्मकथा, जीवनी. जीवन की कुछ चुनी हुई घटनाओं को याद करके लिखना संस्मरण है। अपने पूरे जीवन की कहानी खुद लिखना आत्मकथा है, और किसी और के जीवन की कहानी लिखना जीवनी। यह पाठ आत्मकथा का अंश है, पर संस्मरण के रूप में लिखा गया है: किशोरावस्था से प्रौढ़ावस्था तक के कुछ निजी क्षण।
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