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निर्मल वर्मा — जहाँ कोई वापसी नहीं

निर्मल वर्मा और सिंगरौली

निर्मल वर्मा की विशेषताएँ और 'जहाँ कोई वापसी नहीं' का केंद्रीय विचार बताना।

लेखक-परिचय. निर्मल वर्मा शिमला में जन्मे। उन्होंने दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज में इतिहास पढ़ा।

प्राग. वे प्राग (चेकोस्लोवाकिया) गए, और वहाँ चेक कहानियों-उपन्यासों का हिंदी में अनुवाद किया। बाद में भारत लौटकर उन्होंने स्वतंत्र लेखन किया।

नयी कहानी. वे नयी कहानी आंदोलन के प्रमुख लेखक हैं। 'परिंदे', 'वे दिन', 'अंतिम अरण्य' उनकी प्रसिद्ध रचनाएँ हैं।

सम्मान. 'कव्वे और काला पानी' पर उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।

यह पाठ. 'जहाँ कोई वापसी नहीं' उनकी पुस्तक 'धुंध से उठती धुन' से लिया गया यात्रा-वृत्तांत है। इसमें विकास के नाम पर होने वाले पर्यावरण-विनाश और विस्थापन (घर-गाँव से उजड़ने) की पीड़ा है। लेखक का मत है: विकास और पर्यावरण-सुरक्षा के बीच संतुलन ज़रूरी है।

विकास और पर्यावरण-सुरक्षा के बीच संतुलन ज़रूरी है: यही लेखक का मत है।

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