नमक का दारोगा
प्रेमचंद और कहानी की शुरुआत
प्रेमचंद और कहानी की पृष्ठभूमि समझाना।
लेखक. प्रेमचंद (मूल नाम धनपत राय; जन्म सन् 1880, लमही, उत्तर प्रदेश) हिंदी कथा-साहित्य के सबसे बड़े नाम हैं; हिंदी कहानी के इतिहास को उनके नाम से तीन युगों (प्रेमचंद-पूर्व, प्रेमचंद-युग, प्रेमचंद के बाद) में बाँटा जाता है।
आदर्शोन्मुख यथार्थवाद. यह शब्द प्रेमचंद से जुड़ा है: कहानी में समाज की कड़वी सच्चाई (यथार्थ) दिखाओ, पर अंत आदर्श की ओर ले जाओ। 'नमक का दारोगा' इसका पूरा उदाहरण है: भ्रष्टाचार का सच भी, और ईमानदारी की जीत भी।
पृष्ठभूमि. जब नमक पर सरकारी रोक (नमक-विभाग का कानून) लगी, तो चोरी-छिपे व्यापार और रिश्वत बढ़ गई। दारोगा का पद सबको ललचाता था, क्योंकि उसमें ऊपरी कमाई बहुत थी।
पिता की सीख. वंशीधर के गरीब पिता उन्हें नौकरी पर भेजते हुए सिखाते हैं: पद नहीं, ऊपरी आय देखो। 'मासिक वेतन तो पूर्णमासी का चाँद है': महीने में एक दिन दिखता है, फिर घटते-घटते ग़ायब हो जाता है; ऊपरी आमदनी बहता स्रोत है जिससे सदा प्यास बुझती है।
नई नौकरी. वंशीधर नमक विभाग के दारोगा बनते हैं, और छह महीने में ही अपनी मेहनत और अच्छे आचरण से अफ़सरों का भरोसा जीत लेते हैं।
नया उदाहरण. आज कोई पिता अपने बेटे से कहे 'सरकारी नौकरी में तनख़्वाह भले कम हो, पर ऊपर की कमाई बहुत है', और बेटा जवाब दे 'मैं ईमानदारी से कमाऊँगा': कहानी का संघर्ष आज भी उतना ही पहचाना हुआ है।
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