सबसे खतरनाक
पाश: विद्रोह की कविता
कवि और कविता की पृष्ठभूमि समझाना।
कवि. पाश (मूल नाम अवतार सिंह संधू; सन् 1950-1988) का जन्म पंजाब के जालंधर ज़िले के तलवंडी सलेम गाँव में, एक मध्यवर्गीय किसान परिवार में हुआ। पढ़ाई अनियमित ढंग से स्नातक तक हुई। वे समकालीन पंजाबी साहित्य के महत्वपूर्ण कवि माने जाते हैं।
- पंजाबी रचनाएँ: 'लौह कथा', 'उड़दें बाजां मगर', 'साडै समियां विच', 'लड़ेंगे साथी'; हिंदी अनुवाद: 'बीच का रास्ता नहीं होता', 'लहू है कि तब भी गाता है'।
- जनचेतना फैलाने के लिए उन्होंने कई साहित्यिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम किए और सिआड़, हेमज्योति, हॉक, एंटी-47 पत्रिकाओं का संपादन किया; कुछ समय अमेरिका में भी रहे।
- सन् 1988 में उनकी हत्या कर दी गई।
उनकी कविता. पाश जन आंदोलनों से जुड़े रहे। उन्होंने विद्रोही कविता को तीखा, पर सृजनात्मक तेवर दिया। उनकी कविताएँ विचार और भाव के मेल से बनी हैं, और उनमें लोक संस्कृति और परंपरा की गहरी समझ है।
- पुस्तक कहती है कि पाश लोगों की घटनाओं पर 'आउटसाइडर' (बाहरी आदमी) की तरह प्रतिक्रिया नहीं करते; उनकी कविता में व्यथा, निराशा और ग़ुस्सा है, जो गहरे जुड़ाव (संपृक्तता) के बिना संभव नहीं।
यह कविता. 'सबसे खतरनाक' दिनोदिन क्रूर होती दुनिया की विद्रूपताओं (बदसूरत सच्चाइयों) को दिखाती है, और उस ख़ौफ़नाक स्थिति की ओर इशारा करती है जहाँ मुश्किलों से जूझने के संकल्प कमज़ोर पड़ते जा रहे हैं। कवि को 'पथरायी आँखों-सी तटस्थता' (सब देखकर भी कुछ न करना) से असहमति है।
- कवि के लिए सबसे खतरनाक है: जड़ हालात को बदलने की प्यास का मर जाना, और बेहतर भविष्य के सपनों का गुम हो जाना।
नया उदाहरण. कोई खिलाड़ी चोट से, हार से, कम पैसों से जूझता रहे, पर खेलता रहे; असली ख़तरा तब है जब वह एक दिन कहे 'अब कोई फ़र्क नहीं पड़ता' और जीतने की इच्छा ही छोड़ दे।
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