रजनी
शिक्षा निदेशक, अखबार और आंदोलन
आंदोलन कैसे खड़ा हुआ, यह समझाना।
शिक्षा निदेशक का दफ़्तर. रजनी की स्लिप घंटे भर से चपरासी की जेब में है। तभी एक आदमी स्लिप के नीचे पाँच रुपए का नोट रखकर देता है, और चपरासी उसे तुरंत भीतर ले जाता है: रिश्वत का छोटा रूप।
- रजनी उठकर भीतर जाने लगती है; चपरासी अपनी बंबइया बोली में चिल्लाता है: 'किधर कू जाता? अभी घंटी बजा क्या?' ... 'सुनतीच नई' (सुनती ही नहीं)।
निदेशक से बहस. निदेशक सिगरेट पीता बैठा है। वह गर्व से मानता है कि बोर्ड मान्यता वाले प्राइवेट स्कूलों को 90% ग्रांट देता है और उन पर अपने नियम लागू करता है।
- पर ट्यूशन के धंधे पर वह कहता है: आज तक किसी पेरेंट से ऐसी शिकायत नहीं आई; आप पहली महिला हैं, शायद आख़िरी भी।
- रजनी कहती है कि 'नई शिक्षा प्रणाली' से पहले इस प्रणाली के छेद बंद कीजिए; और जाते-जाते: 'आपके पास शिकायत का ढेर ही लगवाकर रहूँगी।'
मोंटाज. मोंटाज यानी कई छोटे दृश्य जल्दी-जल्दी जोड़कर दिखाना कि समय के साथ क्या-क्या हुआ: रजनी फ़ोन कर रही है, रजिस्टर में नाम-पते उतार रही है, फिर लीला बेन और दूसरी महिलाओं के साथ घर-घर जाकर माँ-बाप को समझा रही है।
अख़बार का साथ. संपादक कहता है: आपने इसे बाकायदा आंदोलन बना दिया; शिक्षा की इस 'दुकानदारी' को बंद होना चाहिए। वह पी.टी.आई. से ख़बर फ़्लैश करवाने का वादा करता है, और 25 तारीख की पेरेंट्स मीटिंग की सूचना भी देगा।
नया उदाहरण. किसी कॉलोनी में पार्क की टूटी लाइटों की शिकायत अकेले एक आदमी करे तो दफ़्तर में फ़ाइल दबी रहती है; जब सौ परिवार दस्तख़त करके पत्र दें और स्थानीय अख़बार ख़बर छापे, तो हफ़्ते भर में मरम्मत हो जाती है।
Practise this lesson
Questions that get harder as you improve, a Tutor that helps without giving the answer away, and progress you can see. Free for every learner.
No account, no email address. Opens the real product.