भारत माता
किसानों की एक-सी तकलीफ़ें और बड़ी दुनिया
किसानों की समस्याएँ और दुनिया से उनका जुड़ाव समझाना।
एक-सी तकलीफ़ें. नेहरू बताते कि उत्तर-पश्चिम में खैबर दर्रे से लेकर धुर दक्षिण में कन्याकुमारी तक, हर जगह किसान उनसे एक-से सवाल पूछते, क्योंकि उनकी तकलीफ़ें एक-सी थीं:
- ग़रीबी और कर्ज़; पूँजीपतियों के शिकंजे;
- ज़मींदार और महाजन; कड़े लगान और सूद;
- पुलिस के ज़ुल्म।
- ये सब उस बोझ से गुँथे थे जो एक विदेशी सरकार ने लाद रखा था; इसलिए छुटकारा भी सबको साथ पाना था।
बड़ी दुनिया. नेहरू चाहते थे कि लोग सारे हिंदुस्तान के बारे में, और उस बड़ी दुनिया के बारे में भी सोचें जिसका हम एक 'जुज़' (हिस्सा) हैं। वे चीन, स्पेन, अबीसिनिया, मध्य यूरोप, मिस्र और पश्चिमी एशिया के संघर्षों, सोवियत यूनियन के बदलावों और अमरीका की तरक्की की बातें बताते।
आसान क्यों? यह काम उतना मुश्किल नहीं था जितना सोचा था:
- किसान पुराने महाकाव्यों और पुराणों की कथाएँ खूब जानते थे;
- कई लोगों ने देश के चारों कोनों के बड़े तीर्थों की यात्रा की थी;
- पुराने सिपाही मिलते, जिन्होंने पिछली बड़ी जंग में विदेशों में नौकरी की थी;
- और सन् तीस के बाद की आर्थिक मंदी ने दिखा दिया था कि दूसरे देशों में जो होता है, उसका असर यहाँ भी पड़ता है।
नया उदाहरण. आज किसी गाँव का किसान भी जानता है कि कहीं दूर तेल महँगा हुआ तो डीज़ल महँगा होगा, और उसका ट्रैक्टर चलाना भी: दुनिया की घटनाएँ गाँव के खेत तक पहुँचती हैं।
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