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भारति, जय, विजयकरे!

संस्कृतनिष्ठ भाषा, समास और अलंकार

कविता की संस्कृतनिष्ठ भाषा, समास और अलंकार पहचानिए।

भाषा. शतदल, गर्जितोर्मि, ज्योतिर्जल, प्रणव, शुभ्र: ये संस्कृत के तत्सम शब्द हैं। छोटे शब्द जोड़कर बने लंबे शब्द (समास) कविता को कसा हुआ और लयदार बनाते हैं। यानी भाषा संस्कृतनिष्ठ और समास वाली है।

समास याद कीजिए. समास = छोटा करना: दो या ज़्यादा शब्द मिलकर नया शब्द। पहला शब्द पूर्वपद, दूसरा उत्तरपद; बना हुआ शब्द समस्त पद; और उसे खोलकर अर्थ बताना विग्रह। जैसे सागरजल = सागर का जल।

कविता से उदाहरण: कनक-शस्य = कनक (सोने) जैसी शस्य (फसल); शतदल = सौ हैं दल (पंखुड़ियाँ) जिसके, यानी कमल; कमलधरे = हे कमल धारण करने वाली (पुकारना, संबोधन)।

अनुप्रास: एक वर्ण बार-बार, जैसे 'शतमुख-शतरव' में श, और 'धवल धार' में ध।

रूपक: बिना 'जैसा' कहे सीधे एक चीज़ को दूसरी कह देना, जैसे 'मुकुट शुभ्र हिम-तुषार' (हिमालय की बर्फ़ ही मुकुट है)। मानवीकरण: प्रकृति को इंसान की तरह काम करते दिखाना, जैसे सागर चरण धोता है और स्तुति करता है।

तत्सम शब्द + समास + अलंकार = कसी हुई, चित्रों से भरी कविता।

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