भारति, जय, विजयकरे!
प्रकृति की रक्षा और सृजन
प्रकृति की रक्षा पर विचार कीजिए और अपनी रचना लिखिए।
आज का हार और मुकुट. कविता का सफ़ेद हार (गंगा) आज सीवेज, कारखानों के कचरे और प्लास्टिक से मैला है; और मुकुट (हिमालय) के हिमनद तापमान बढ़ने से पिघलकर पीछे हट रहे हैं, जिससे अचानक बाढ़ और भूस्खलन बढ़े हैं।
वन बचाने के कानून: भारतीय वन अधिनियम 1927, वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972, वन (संरक्षण) अधिनियम 1980, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986, जैव विविधता अधिनियम 2002। लोगों की भागीदारी का उदाहरण: चिपको आंदोलन, जिसमें लोग पेड़ों से लिपटकर उन्हें कटने से बचाते थे।
गंगा की यात्रा: गंगोत्री (गोमुख) हिमनद से भागीरथी निकलती है; देवप्रयाग में अलकनंदा से मिलकर गंगा बनती है; हरिद्वार में मैदान में आती है; प्रयागराज में यमुना से संगम; फिर वाराणसी के घाट, पटना; और बंगाल में हुगली और सुंदरबन होते हुए गंगासागर पर बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है।
सृजन. भारत को मनुष्य के रूप में सजाना हो तो अपने राज्य की वेशभूषा, गहने, फूल और प्रतीक लीजिए; डाक टिकट बनाएँ तो ऐसे प्रतीक चुनिए जिनका कारण बता सकें।
झरोखे से. मैथिलीशरण गुप्त की कविता 'जय जय भारतमाता' में हिमालय अपने भीतर दर्द और आग दबाकर भी हमें हरा-भरा रखता है और सौ सोतों से पानी देता है; निराला की तरह यहाँ भी प्रकृति भारत की पालनहार है। खोजबीन: निराला की 'वर दे, वीणावादिनि वर दे!' भी संस्कृतनिष्ठ है और सरस्वती की वंदना है।
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