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घर की याद

घर, परिवार और स्वतंत्रता संग्राम

घर, परिवार और स्वतंत्रता संग्राम पर विचार कीजिए।

घर क्या है? इस कविता का 'घर' ईंट-पत्थर नहीं, रिश्ते और भावनाएँ है। संयुक्त परिवार में दुख-सुख में सबका साथ और सहारा ज़्यादा है; एकल परिवार में आज़ादी और निजता ज़्यादा है; दोनों के अपने फ़ायदे और कमियाँ हैं।

लगातार बारिश की मुश्किलें: गाँवों में फसलें सड़ना, कच्चे घर गिरना, रास्ते कट जाना; शहरों में सड़कों पर जलभराव, जाम, बिजली कटना, बीमारियाँ।

आज़ादी की लड़ाई का क्रम: 1857 → कांग्रेस (1885) → स्वदेशी (1905) → चंपारण (1917) → असहयोग (1920) → दांडी (1930) → भारत छोड़ो (1942) → 15 अगस्त 1947। भवानीप्रसाद मिश्र जैसे हज़ारों लोग इसी में जेल गए।

प्रकृति संदेशवाहक: कालिदास के 'मेघदूत' में बादल (मेघ), नल-दमयंती में हंस, 'पवनदूत' में हवा, 'पद्मावत' में हीरामन तोता। इस कविता में कवि सावन के हाथ संदेश भेजता है।

साथ-साथ पढ़ें (पृ. 206): रामनरेश त्रिपाठी की 'तब याद तुम्हारी आती है': सुबह चिड़ियों का गाना, कलियों का खिलना, ठंडी हवा, रात में तारे और चाँद, इन सबको देखकर कवि को संसार बनाने वाले प्रभु की याद आती है। फ़र्क देखिए: 'घर की याद' में प्रकृति घर की याद जगाती है और भाव दुख का है; यहाँ ईश्वर की, और भाव आनंद का।

घर यानी रिश्ते; और प्रकृति यादें जगाने वाली दूत है।

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