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क्या लिखूँ?

समास

समास के छह भेद पहचानिए।

समास का मतलब है छोटा करना: दो या ज़्यादा शब्द मिलकर एक नया शब्द बनाते हैं, जैसे गंगा + जल = गंगाजल। पहला शब्द पूर्वपद, दूसरा उत्तरपद; बना हुआ शब्द समस्त पद; और उसे फिर से खोलकर लिखना समास-विग्रह (गंगाजल = गंगा का जल)।

तत्पुरुष: दूसरा पद (उत्तरपद) प्रधान, और बीच के शब्द (का, से, के लिए) छिप जाते हैं: रसोईघर = रसोई के लिए घर; निबंधशास्त्र = निबंध का शास्त्र। कर्मधारय: पहला पद विशेषण (कैसा?) और दूसरा उसकी चीज़: नीलकमल = नीला कमल।

द्विगु: पहला पद गिनती बताता है, और अक्सर समूह का अर्थ होता है: तिरंगा = तीन रंगों का समूह।

बहुव्रीहि: दोनों पद पीछे रह जाते हैं और मिलकर किसी तीसरे की ओर इशारा करते हैं: पीतांबर = पीला है वस्त्र जिसका, यानी कृष्ण। द्वंद्व: दोनों पद प्रधान, बीच का 'और' छिपा: भाई-बहन = भाई और बहन।

अव्ययीभाव: पहला पद अव्यय (जो कभी नहीं बदलता), और पूरा शब्द क्रिया का ढंग बताता है: यथाशक्ति = शक्ति के अनुसार। दोहराए शब्द भी इसी में आते हैं: धीरे-धीरे, दिनोदिन। पहचानने की तरकीब: विग्रह करो और देखो कि कौन-सा पद प्रधान है।

विग्रह करके देखो कि कौन-सा पद प्रधान है; उसी से समास पहचानो।

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