क्या लिखूँ?
उपसर्ग, प्रत्यय और शब्द-संपदा
उपसर्ग और प्रत्यय जोड़कर नए शब्द बनाइए।
उपसर्ग छोटे सार्थक टुकड़े हैं जो अकेले नहीं आते, शब्द के आगे लगकर नया शब्द बनाते हैं: दुर् + बोध = दुर्बोध (कठिनाई से समझ में आने वाला), अन् + आदि = अनादि, अ + संतोष = असंतोष, सु + मधुर = सुमधुर।
प्रत्यय शब्द के पीछे लगते हैं: सुधार + क = सुधारक, कठिन + आई = कठिनाई, मधुर + ता = मधुरता, प्रगति + शील = प्रगतिशील। याद रखने की तरकीब: उपसर्ग आगे, प्रत्यय पीछे।
मिलते-जुलते शब्द: विचार, मनन, चिंतन; सुहावने, मधुर, मनमोहक; उमंग, स्फूर्ति। इन्हें वाक्य में लगाकर देखिए, तब इनके बीच का छोटा-सा फ़र्क समझ आता है।
शब्द-संपदा: स्फूर्ति (फुर्ती, जोश), आवेग (अचानक उठा भाव), विज्ञ (विद्वान, जानकार), अनुसंधान (खोज), दुर्बोध (कठिनाई से समझ आने वाला), गांभीर्य (गंभीरता), अज्ञ (नासमझ)।
पद्धति (तरीका), पाश्चात्य (पश्चिम का), आख्यायिका (कथा), उदात्त (ऊँचा, श्रेष्ठ), कोलाहल (शोर), कलरव (मधुर आवाज़, जैसे चिड़ियों की), विषाद (उदासी)।
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