क्या लिखूँ?
लेखन, लोकोक्ति और अनमेली
लोकोक्तियों का प्रयोग कीजिए और अपनी रचना लिखिए।
लोकोक्ति लोगों में चलने वाला ऐसा वाक्य है जिसमें अनुभव का सार या कोई सीख होती है। लोकोक्तियाँ बताती हैं कि लोग क्या सोचते और मानते हैं, और भाषा को धनी बनाती हैं।
'दूर के ढोल सुहावने होते हैं': दूर की चीज़ अच्छी लगती है, पास जाने पर उसकी असलियत पता चलती है। 'आम के आम गुठलियों के दाम': एक काम से दोहरा लाभ, जैसे कचरे से जैविक खाद बनाना (सफ़ाई भी, खाद भी)।
अनमेली हास्य-व्यंग्य वाली कविता की एक शैली है, जिसमें बेमेल बातें जोड़कर मज़ा लाया जाता है। खुसरो ने खीर, चरखा, कुत्ता और ढोल को एक ही पद में जोड़ दिया था।
अज्ञेय (पाठ के अंत में 'मैं क्यों लिखता हूँ') कहते हैं कि वे यह जानने के लिए लिखते हैं कि क्यों लिखते हैं: भीतर की एक विवशता (मजबूरी) को पहचानने और उससे मुक्त होने के लिए। सच्चा लेखक ईमानदारी से पहचानता है कि कौन-सी प्रेरणा भीतर से है और कौन-सा दबाव बाहर से (संपादक, प्रकाशक, पैसा)।
अनुभव पर डायरी: तारीख़, घटना, दूर से बनी राय और पास जाकर दिखा सच, अपनी भावनाएँ, और अंत में सीख। ('दूर के ढोल' पर अपना कोई अनुभव लिखने के लिए यह ढाँचा अच्छा है।)
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