ऐसी भी बातें होती हैं (लता मंगेशकर से साक्षात्कार)
साक्षात्कार विधा
जानिए कि साक्षात्कार विधा कैसी होती है और उसके तत्व क्या हैं।
साक्षात्कार में एक व्यक्ति प्रश्न पूछता है, दूसरा उत्तर देता है। यहाँ साक्षात्कारकर्ता (पूछने वाले) यतींद्र मिश्र हैं और साक्षात्कारदाता (जवाब देने वाली) लता मंगेशकर। हर हिस्से से पहले बोलने वाले का नाम लिखा होता है।
शुरुआत में आमंत्रण, स्वागत और परिचय होता है: यतींद्र जी करोड़ों प्रशंसकों की ओर से प्रणाम करते हैं, लता जी आभार जताती हैं।
कोष्ठक के संकेत, जैसे (हँसते हुए) या (खिलखिलाकर हँसती हैं), बताते हैं कि जवाब किस ढंग से दिया गया। जवाबों में विचार और उदाहरण हैं (संगीत की शक्ति पर सरोद का किस्सा) और संस्मरण हैं (बचपन, त्योहार, नौशाद साहब को मिठाई)।
यह साक्षात्कार औपचारिक कम, आत्मीय बातचीत ज़्यादा है: 'दीदी' कहकर बात, हँसी, भावुक यादें। इसका समापन ईश्वर से प्रार्थना और 'नाम रह जाता है' के भाव पर होता है।
एक उत्तर से कई प्रश्न बन सकते हैं। उत्तर 'संगीत में असीम शक्ति है' से: 'लता जी ने संगीत के बारे में क्या कहा?' और 'संगीत की क्या विशेषता बताई गई?'। अच्छा साक्षात्कार लेने के लिए पहले सोचिए कि जवाब से क्या जानना है, फिर सवाल बनाइए।
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