ऐसी भी बातें होती हैं (लता मंगेशकर से साक्षात्कार)
लता जी का व्यक्तित्व
लता मंगेशकर के व्यक्तित्व को समझिए।
पूरे साक्षात्कार में लता जी की छवि सादगी, समर्पण और आत्मसम्मान की है। इतनी बड़ी कलाकार होकर भी उनमें न घमंड है, न अपनी तारीफ़ का शौक।
समर्पण और कर्तव्य. उन्हें गाने और रिकॉर्डिंग के सिवा किसी चीज़ की सुध नहीं रहती थी। 13 साल की उम्र में पिता के निधन के बाद उन्होंने पूरे परिवार को सँभाला: यह कर्तव्यनिष्ठा है।
स्वाभिमान और दृढ़ता. 'जो बात सही लगे, उसे करो; किसी के आगे झुकने की ज़रूरत नहीं।' उन्होंने कभी किसी के आगे हाथ नहीं फैलाया।
विनम्रता और कृतज्ञता. उन्हें लगता है कि लोगों से जितना प्यार मिला, शायद गाकर उतना आभार वे जता नहीं पाईं। लोग उन्हें 'अमर' कहें तो वे इसे बस मिले हुए प्यार की तरह लेती हैं, और ईश्वर से कहती हैं: 'जो दिया, बहुत दिया।' साथ ही उनमें दार्शनिकता है: गाना अमर है, शरीर नहीं।
पिता का नाम आगे बढ़ाना उनके लिए सिर्फ़ प्रसिद्धि नहीं था; यह पिता के संगीत और संस्कारों को जीवन में निभाने की ज़िम्मेदारी थी।
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