मंगलेश डबराल — संगतकार
हिचक में मनुष्यता
संगतकार की हिचक को मनुष्यता के रूप में समझाना।
सात स्वर, तीन सप्तक. संगीत के सात स्वर हैं: सा, रे, ग, म, प, ध, नि। इनके समूह को सप्तक कहते हैं। सामान्य आवाज़ मध्य सप्तक; उससे ऊँची आवाज़ तार सप्तक; उससे नीची मंद्र सप्तक। तो तार सप्तक = बहुत ऊँचे स्वर। (कुछ वीडियो इसे 'थक जाना' बताते हैं; यह गलत है।)
ऊँचे सुर पर गला बैठा. जब मुख्य गायक बहुत ऊँचे स्वरों (तार सप्तक) पर गाता है, तो उसका गला बैठने लगता है। प्रेरणा साथ छोड़ने लगती है, उत्साह डूबते सूरज की तरह अस्त होने लगता है, और आवाज़ से मानो राख जैसा कुछ गिरने लगता है, यानी आवाज़ बुझने लगती है।
ढाँढ़स बँधाता स्वर. ठीक तभी कहीं से संगतकार का स्वर आ जाता है और गायक को ढाँढ़स (हिम्मत, तसल्ली) देता है। कभी-कभी वह बस यूँ ही साथ गा देता है, यह बताने के लिए कि 'तुम अकेले नहीं हो', और कि जो राग एक बार गाया जा चुका, उसे फिर से गाया जा सकता है।
हिचक क्यों? संगतकार की आवाज़ में एक हिचक साफ़ सुनाई देती है। वह अपना स्वर मुख्य गायक से ऊँचा नहीं उठाता। लोग सोच सकते हैं कि वह कमज़ोर है। कवि कहता है: नहीं, इसे उसकी विफलता नहीं, मनुष्यता समझो।
मनुष्यता यानी क्या? वह मुख्य गायक का सम्मान करता है और उससे आगे निकलकर उसकी चमक नहीं छीनना चाहता। अपने को पीछे रखना त्याग और विनम्रता है, और यही बड़प्पन है। किताब भी कहती है: उनका सामने न आना उनकी कमज़ोरी नहीं, मानवीयता है।
करके देखिए. एक साथी एक आसान-सी टेक (स्थायी) गाता रहे, दूसरा उसके ऊपर लंबी, ऊँची तान ले। जब ऊँची तान टूटे, तो टेक गीत को थामे रखती है। कविता का अर्थ आप सुन पाएँगे।
Practise this lesson
Questions that get harder as you improve, a Tutor that helps without giving the answer away, and progress you can see. Free for every learner.
No account, no email address. Opens the real product.