मातृभूमि
पग-पग जैसे जोड़े
'पग-पग' जैसे शब्दों के जोड़े पहचानो।
अपनी किताब 'मल्हार' का पृष्ठ 6 खोलो। 'शब्दों के रूप' में किताब कविता 'मातृभूमि' का एक शब्द-जोड़ा दिखाती है: 'पग-पग'। कविता में नदियों की छटा पग-पग पर बिखरी है। यहाँ 'पग' शब्द दो बार आया है, और इसका अर्थ है — 'हर पग' या 'हर कदम' पर।
जब एक ही शब्द दो बार साथ-साथ आता है, तो अक्सर उसका अर्थ 'हर' हो जाता है। पृष्ठ 7 पर ऐसे ही कुछ जोड़े हैं: 'घर-घर' यानी हर घर, 'देश-देश' यानी हर देश, 'पर्वत-पर्वत' यानी हर पर्वत, और 'साँस-साँस' यानी हर साँस।
इन्हें वाक्यों में देखो: दीवाली पर घर-घर दीये जलते हैं — यानी हर घर में। उसकी साँस-साँस में देश का प्यार बसा है — यानी हर साँस में। गौतम की बात देश-देश तक पहुँची — यानी हर देश तक।
ध्यान रखो: दोनों शब्दों के बीच एक छोटी रेखा (-) लगती है, जैसे पग-पग, घर-घर। यह जोड़ा एक ही शब्द को दोहराकर बनता है, और इससे बात पर ज़ोर भी आता है।
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