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परीक्षा

मन के भावों के नाम

मन के अलग-अलग भावों के नाम सीखो।

आपकी किताब 'मल्हार' के पाठ 10 'परीक्षा' में, जब खिलाड़ी फँसी हुई गाड़ी के पास से निकले, तो कहानी बताती है कि उनमें स्वार्थ था, मद था, पर उदारता और वात्सल्य का नाम भी नहीं था। पृष्ठ 114 पर किताब इन चार शब्दों पर ध्यान दिलाती है: स्वार्थ, मद, उदारता, वात्सल्य।

ये चारों शब्द नाम हैं, पर किसी दिखाई देने वाली चीज़, व्यक्ति या जगह के नाम नहीं। 'गाड़ी', 'किसान', 'देवगढ़' को हम देख सकते हैं; पर 'स्वार्थ' को कोई छूकर या देखकर नहीं दिखा सकता। ये मन के भावों के नाम हैं।

इनके अर्थ समझो: स्वार्थ — सिर्फ़ अपना भला सोचना; मद — घमंड; उदारता — खुले दिल से दूसरों का भला करना; वात्सल्य — छोटों के लिए प्यार और ममता।

कहानी में ऐसे और भी बहुत-से नाम हैं। युवक के हृदय में दया और साहस था; सुजानसिंह ने आत्मबल की बात की; खिलाड़ियों की आँखों में सहानुभूति नहीं थी; कर्मचारियों की आँखों में सत्कार था और उम्मीदवारों की आँखों में ईर्ष्या; चुनाव के दिन चेहरों पर आशा और निराशा थी; मिस्टर 'ल' को किताबों से घृणा थी; और उम्मीदवार नम्रता का दिखावा करते थे। ये सब मन के भावों के नाम हैं।

स्वार्थ, मद, उदारता, वात्सल्य, दया, साहस, ईर्ष्या जैसे शब्द नाम तो हैं, पर दिखाई देने वाली चीज़ों, व्यक्तियों या जगहों के नहीं — ये मन के भावों के नाम हैं।

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