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चेतक की वीरता

कविता के कठिन शब्द

कविता में आए युद्ध से जुड़े कठिन शब्दों के अर्थ सीखो।

कविता 'चेतक की वीरता' (किताब 'मल्हार', पृष्ठ 122-123) में युद्ध के बहुत-से पुराने, कठिन शब्द आते हैं। इनके अर्थ किताब के आखिर में दिए 'शब्दकोश' में मिलते हैं। अर्थ जानकर ही कविता का पूरा चित्र आँखों के सामने आता है।

युद्ध और शत्रु के शब्द: रण — युद्ध; अरि — शत्रु (अरि-मस्तक — शत्रु का माथा); वैरी — शत्रु (वैरी-समाज — शत्रुओं का दल)। हथियारों के शब्द: करवाल — तलवार; निषंग — तरकश (वह थैला जिसमें तीर रखे जाते हैं)।

घोड़े के शब्द: हय — घोड़ा (हय-टाप — घोड़े के पाँव धरती पर पड़ने से उठी आवाज़); बाग — लगाम, यानी घोड़े को चलाने वाली रस्सी। शरीर का शब्द: पुतली — आँख के बीच का काला भाग।

कैसा था, बताने वाले शब्द: विकराल — भीषण, भयंकर; बज्र-मय (वज्र-मय) — कठोर, भीषण; निर्भीक — जो किसी से न डरे, निडर। और नद — बड़ी नदी। कविता में चेतक 'बढ़ते नद' की तरह लहराता है।

कविता के कठिन शब्दों के अर्थ शब्दकोश में मिलते हैं: रण — युद्ध, अरि और वैरी — शत्रु, करवाल — तलवार, निषंग — तरकश, हय — घोड़ा, बाग — लगाम, निर्भीक — निडर।

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