चेतक की वीरता
तुकांत शब्द
कविता के तुकांत शब्द खोजो।
अपनी किताब 'मल्हार' के पृष्ठ 122-123 पर कविता 'चेतक की वीरता' ज़ोर से पढ़ो और पंक्तियों के आखिरी शब्दों पर ध्यान दो। पृष्ठ 125 पर किताब ने कुछ शब्दों के नीचे रेखा खींची है: 'निराला' और 'पाला', 'कोड़ा' और 'घोड़ा'।
ये शब्द बोलने और लिखने में आखिर में मिलते-जुलते हैं: निराला — पाला (दोनों '-आला' पर ख़त्म), कोड़ा — घोड़ा (दोनों '-ओड़ा' पर ख़त्म)। ऐसे शब्दों को तुकांत शब्द कहते हैं। इस तरह की तुकांत शैली अक्सर कविताओं में आती है — इससे कविता में लय आती है और वह गाने में अच्छी लगती है।
इस कविता में और भी तुकांत शब्द हैं। चौथे भाग में चार शब्द एक साथ तुक मिलाते हैं: चालों, भालों, ढालों, करवालों (सब '-आलों' पर)। पृष्ठ 123 पर: लहर, ठहर, घहर (सब '-हर' पर); और निषंग, अंग, दंग, रंग (सब '-अंग' पर)।
पर किताब यह भी बताती है कि कभी-कभी कविता अतुकांत भी होती है — यानी उसकी पंक्तियों के अंत में तुक नहीं मिलती। हर कविता तुकांत हो, यह ज़रूरी नहीं।
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