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चेतक की वीरता

शब्द में छिपे शब्द

शब्दों के भीतर छिपे शब्द खोजो।

कविता 'चेतक की वीरता' (किताब 'मल्हार', पृष्ठ 122) में चेतक के दौड़ने की तुलना आसमान से होती है। पृष्ठ 126 पर किताब 'आसमान' शब्द के साथ एक खेल खिलाती है: इस एक शब्द के भीतर कई शब्द छिपे हैं — आस, समान, मान, सम, आन, नस।

इनमें से कुछ शब्द सीधे क्रम से मिल जाते हैं: 'आस' (आ-स), 'समान' (स-मा-न), 'मान' (मा-न), 'सम' (स-म)। और कुछ अक्षरों को चुनकर बनते हैं, जैसे 'आन' और 'नस'। शर्त एक ही है: जो शब्द मिले, वह सार्थक हो — यानी उसका कोई अर्थ हो।

अब कविता के कुछ और शब्दों में झाँकें। 'मस्तक' (अरि-मस्तक) में 'मस्त' और 'तक' छिपे हैं। 'बादल' में 'बाद' और 'दल'। 'सवार' में 'सवा' और 'वार'। 'भयानक' में 'भय' (यानी डर)। और 'चेतक' के आखिर में भी 'तक' छिपा है!

यह खेल हमें सिखाता है कि शब्दों को ध्यान से देखने पर उनके भीतर नए शब्द मिलते हैं। कविता के दूसरे शब्दों में भी खोजकर देखो।

एक शब्द के भीतर कई सार्थक शब्द छिपे हो सकते हैं — जैसे 'आसमान' में आस, समान, मान, सम; 'मस्तक' में मस्त और तक; 'बादल' में बाद और दल।

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