चेतक की वीरता
पहेली बूझो
पाठ के अंत की पहेली बूझो।
पाठ 11 'चेतक की वीरता' के आखिर में, आपकी किताब 'मल्हार' के पृष्ठ 127 पर, पाँच पहेलियाँ हैं — 'बूझो तो जानें'। पहेली में किसी चीज़ के बारे में इशारे दिए जाते हैं, और हमें सोचकर उसका नाम बताना होता है। किताब के आखिर में (पृष्ठ 165 पर) इनके उत्तर भी दिए हैं। आओ, हर पहेली को समझें।
पहली पहेली: मेरा नाम तीन अक्षर का है, उसे उलटा पढ़ो या सीधा, एक जैसा रहता है; मैं दिन में जागता हूँ और रात में सोता हूँ। उत्तर: जलज। 'जलज' का अर्थ है जल में जन्मा — यानी कमल। ज-ल-ज उलटा पढ़ो तो भी ज-ल-ज! और कमल दिन में खिलता है, रात में बंद हो जाता है।
दूसरी पहेली: एक अनोखा पक्षी, जो बिना पंखों के अकेला उड़ता है; उसके गले में लंबी डोर बँधी है और वह आकाश का छोर पकड़ता है। उत्तर: पतंग। तीसरी पहेली: मैं रात में हूँ, दिन में नहीं; दीये के नीचे हूँ, ऊपर नहीं। उत्तर: अंधेरा (दीये के ऊपर तो रोशनी होती है, नीचे अंधेरा)।
चौथी पहेली: मेरे नाम में फल, फूल और मिठाई — तीनों समाए हैं, और मुझे देखकर सबके मुँह में पानी आ जाता है। उत्तर: गुलाबजामुन — 'गुलाब' एक फूल है, 'जामुन' एक फल है, और पूरा 'गुलाबजामुन' एक मिठाई है! पाँचवीं पहेली: मुझमें सड़क है पर गाड़ी नहीं, जंगल है पर पेड़ नहीं, शहर है पर घर नहीं, समंदर है पर पानी नहीं। उत्तर: मानचित्र (नक्शा) — उसमें सब कुछ बना होता है, पर असली नहीं।
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