हिंद महासागर में छोटा-सा हिंदुस्तान
गुप्त वाक्य
पहेली का गुप्त वाक्य पढ़ो और उसे सुलझाओ।
पाठ 12 की 'आज की पहेली' में एक गुप्त वाक्य है: 'येला मालथ येला घौलश'। पहली नज़र में यह किसी भाषा जैसा नहीं लगता! इसके साथ एक संकेत दिया है: क ← ख।
संकेत का मतलब है: जहाँ 'ख' लिखा है, वहाँ असल में 'क' है। यानी गुप्त वाक्य के हर व्यंजन की जगह वर्णमाला में उससे ठीक पहले वाला व्यंजन रखो। मात्राएँ (ा, े, ौ) जैसी हैं, वैसी ही रहती हैं।
वर्णमाला का क्रम याद करो: क ख ग घ … त थ द ध न, प फ ब भ म य र ल व श। अब पहला शब्द खोलो: 'ये' में य है — य से ठीक पहले म, तो 'मे'। 'ला' में ल है — ल से ठीक पहले र, तो 'रा'। पहला शब्द बना 'मेरा'।
दूसरा शब्द 'मालथ': म से पहले भ, तो 'भा'; ल से पहले र; थ से पहले त — बना 'भारत'। चौथा शब्द 'घौलश': घ से पहले ग, तो 'गौ'; ल से पहले र; श से पहले व — बना 'गौरव'।
तो पूरा वाक्य है: 'मेरा भारत मेरा गौरव'। किताब के अंत में 'पहेलियों के उत्तर' में भी यही लिखा है। यह पाठ के भाव से भी मेल खाता है, जिसमें लेखक भारतीयों की सफलता पर गर्व की बात करते हैं।
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