हिंद महासागर में छोटा-सा हिंदुस्तान
शिवरात्रि और परी-तालाब
मॉरिशस की शिवरात्रि और परी-तालाब के बारे में पढ़ो।
पाठ 12 में लेखक मॉरिशस के धार्मिक जीवन की बात करते हैं। मॉरिशस के हर प्रमुख गाँव में शिवालय (शिवजी का मंदिर) है। वहाँ के हिंदू तुलसीदास की रामायण — रामचरितमानस — का पाठ करते हैं, या ढोलक और झाँझ पर उसे गाते हैं।
लेखक ने मॉरिशस के मंदिर और शिवालय बहुत स्वच्छ (साफ़) और सुरम्य (सुंदर) पाए। उन्होंने कामना की कि भारत में भी हम अपने मंदिरों और तीर्थ-स्थानों को उतना ही स्वच्छ और सुंदर रखें।
भारत के पर्व-त्योहार मॉरिशस में भी मनाए जाते हैं, पर वहाँ साल का सबसे बड़ा (सर्वश्रेष्ठ) धार्मिक पर्व शिवरात्रि है। मॉरिशस के बीच में एक झील है, जिसका संबंध हिंदुओं ने परियों से जोड़ दिया, इसलिए उसका नाम परी-तालाब पड़ गया। (बाद में उसका नाम गंगा-तालाब रखा गया।) परी-तालाब तीर्थ भी है और पिकनिक की जगह भी; पर वहाँ पिकनिक पर जाने वाले लोग माँस-मछली साथ नहीं ले जाते।
शिवरात्रि पर मॉरिशस के हिंदू श्वेत (सफ़ेद) कपड़े पहनकर, कंधों पर काँवर लिए, जुलूस बनाकर परी-तालाब आते हैं। वहाँ से जल भरकर वे अपने-अपने गाँव के शिवालय लौटते हैं, शिवजी को जल चढ़ाते हैं, और उसके बाद ही अपने घरों में जाते हैं। यह सब वे बड़ी भक्ति और पवित्रता से करते हैं।
उस दिन सभी वयस्क (बड़े) लोग उजली धोती, उजली कमीज़ और उजली गाँधी टोपी पहनते हैं। बच्चे हाफ़ पैंट पहन सकते हैं, पर गाँधी टोपी उन्हें भी पहननी पड़ती है। परी-तालाब का यह मेला मॉरिशस के प्रमुख आकर्षणों में से एक है, और इसे देखने दूसरे धर्मों के लोग भी काफ़ी संख्या में आते हैं।
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