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पहली बूँद

सामान्य अर्थ और भावार्थ

कविता की पंक्तियों का सामान्य अर्थ और भावार्थ समझो।

अपनी किताब 'मल्हार' का पृष्ठ 28 खोलो और 'कविता की रचना' पढ़ो। कविता की किसी पंक्ति के दो अर्थ हो सकते हैं। एक, 'सामान्य अर्थ' — यानी शब्दों का सीधा-सीधा अर्थ। दूसरा, 'भावार्थ' — यानी वह भाव जो कवि सच में कहना चाहता है।

कविता 'पहली बूँद' (पृष्ठ 25) में कवि कहता है कि आसमान में सागर उड़ रहा है, और बिजलियाँ उसके सुनहरे पंख हैं। इसका सामान्य अर्थ देखें तो बात असंभव है — समुद्र सचमुच आकाश में नहीं उड़ सकता।

पर भावार्थ समझें तो बात साफ़ हो जाती है: समुद्र का जल ही बादल बनकर ऊपर जाता है, और वह बिजलियों के सुनहरे पंख लगाकर आकाश में उड़ रहा है। यानी कवि बादलों को उड़ता हुआ सागर कह रहा है।

कविता में ऐसे और भी चित्र हैं। धरती के सचमुच होंठ नहीं होते, पर कवि उसके 'सूखे अधर' कहता है — भाव है, सूखी और प्यासी धरती। बादल सचमुच नगाड़े नहीं बजाते — भाव है, बादल गरज रहे हैं। किताब कहती है कि ऐसे प्रयोग कविता की सुंदरता बढ़ाते हैं और उसे आनंददायक भी बनाते हैं।

कविता की पंक्ति का सामान्य अर्थ असंभव हो सकता है, पर उसका भावार्थ सुंदर होता है: 'आसमान में उड़ता सागर' का भाव है कि समुद्र का जल (बादल बनकर) बिजलियों के सुनहरे पंख लगाकर आकाश में उड़ रहा है।

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